![]() |
अशरफ जी से बात करते हुए. |
देश की राजनीति में डिग्री को लेकर चल रही बहस के बीच रांची के रामनगर निवासी अशरफ हुसैन एक मिशाल हैं। अशरफ डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त हैं, किताब लिख चुके हैं और प्रोफ़ेसर भी हैं फिर भी फुटपाट पर सैलून चलाते हैं। मिशाल इसलिए हैं क्योंकि इतनी डिग्री होने के बाद भी अशरफ शोर नहीं मचाते बल्कि गर्व के साथ हजाम का काम करते हैं। अशरफ 2011 में "ए कोम्परेटिव एंड एनालिटिकल स्टडी ऑफ़ साऊथ उर्दू स्टोरी रायटर इन झारखण्ड" सब्जेक्ट पर पीएचडी की डिग्री हाशिल किये। मैं पहली बार 2012 में मिला था अशरफ से तो स्टोरी भी की थी। उस वक्त अशरफ ने इच्छा जताई थी कि कहीं पढ़ाने का मौका मिलता तो अच्छा होता। अब दिसम्बर 2015 से अशरफ मौलाना आज़ाद कॉलेज में पढ़ा रहे हैं। बतौर विजिटिंग फ्रोफेसर। अशरफ बताते हैं 3 हज़ार के आसपास महीने में उधर से मिल जाता है। लेकिन इतना से घर नहीं चलता इसलिए पैतृक व्यवसाय हजाम का भी काम करना पड़ता है। अशरफ को लोग प्यार से डॉक्टर बारबर भी बोलते हैं। हाल ही में अशरफ ने झारखण्ड के महिला उर्दू उपन्यासकार पर एक किताब लिखी है। चुकी किताब महिला पर है इसलिए वो चाहते हैं कि इसका विमोचन राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू कर दें। अशरफ इसका प्रयास भी कर चुके हैं। राजभवन किताब लेकर गए थे लेकिन यही कहकर लौटा दिया गया कि किताब उर्दू में है यहाँ कोई पढ़ नहीं सकता। अगर किताब में कुछ विवादस्पद बातें होगी तो।
फेसबुक पर अशरफ जी के लिए पड़े कमेन्ट
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें